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2026-08-31· 5 min read

राहु काल क्या है? गणना कैसे होती है और क्या न करें

राहु काल हर दिन का लगभग 90 मिनट का अशुभ समय है। जानिए यह आपके शहर के सूर्योदय से कैसे निकलता है, हर शहर में अलग क्यों होता है, और व्यवहार में क्या ध्यान रखें।

राहु काल क्या है

राहु काल दिनमान (सूर्योदय से सूर्यास्त) का आठवाँ भाग है — लगभग 90 मिनट — जो हर दिन छाया ग्रह राहु को समर्पित होता है। परंपरा में यह नए कार्यों की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है: अनुबंध, यात्रा, विवाह, गृह प्रवेश या बड़ी खरीदारी। पहले से चल रहे नियमित काम पर इसका प्रभाव नहीं माना जाता।

गणना कैसे होती है (और आपका शहर क्यों मायने रखता है)

स्थानीय सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को आठ बराबर भागों में बाँटिए। हर वार को राहु अलग खंड पर राज करता है: सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ।

चूँकि यह आपके स्थानीय सूर्योदय से जुड़ा है, एक ही दिन दिल्ली और चेन्नई का राहु काल अलग होता है — और साल भर दिन छोटे-बड़े होने के साथ बदलता रहता है। छपी हुई कोई भी स्थायी तालिका अनुमानित होती है; सही समय के लिए आपके शहर का आज का वास्तविक सूर्योदय चाहिए।

व्यवहार में कैसे अपनाएँ

राहु काल को डर नहीं, समय-नियोजन का फ़िल्टर मानिए: जब संभव हो, महत्वपूर्ण शुरुआतें इस अवधि से बाहर रखिए। और सच में बड़े कार्यों — विवाह, व्यापार आरंभ, गृह प्रवेश — के लिए एक कदम आगे जाकर उचित मुहूर्त चुनिए, जिसमें तिथि, नक्षत्र, योग और लग्न सब तौले जाते हैं।

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